navbharattimes.indiatimes.com · Mar 1, 2026 · Collected from GDELT
Published: 20260301T054500Z
पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में एनएसयूआई के शांतनु शेखर बने अध्यक्ष तो खुशी कुमारी महासचिवपटना: 55 साल बाद शांतनु शेखर ने NSUI ही नहीं, बिहार कांग्रेस नेताओं को भी मुस्कुराने का मौका दिया। बिहार की राजनीति की 'नर्सरी' कही जाने वाली पटना यूनिवर्सिटी में एनएसयूआई ने लंबे समय बाद इतिहास दोहराया। पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2026 के परिणामों में NSUI के शांतनु शेखर ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाकर कांग्रेस के छात्र संगठन की 55 साल बाद वापसी कराई। आखिरी बार 1971-72 में राम जतन सिन्हा के रूप में NSUI का अध्यक्ष चुना गया था, जिसके बाद 1973 में लालू प्रसाद यादव की जीत ने समाजवादी राजनीति का दौर शुरू किया। 28 साल का लंबा प्रतिबंध रहा। फिर 2012 में नीतीश कुमार सरकार की ओर से चुनाव प्रक्रिया बहाल की गई। उसके बाद से NSUI की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है। अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ के पहले अध्यक्ष कौन थे?1971-72 में राम जतन सिन्हा को कामयाबी मिली थी। NSUI के बैनर तले पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ के पहले अध्यक्ष बने थे। उनके बाद 1973 में लालू प्रसाद यादव ने 'समाजवादी' खेमे से जीत दर्ज कर कांग्रेस के एकाधिकार को तोड़ दिया था। तब से लेकर अब तक, यानी करीब साढ़े पांच दशकों के बाद शांतनु शेखर ने इस प्रतिष्ठित कुर्सी पर दोबारा NSUI का परचम लहराया है। ये जीत कैंपस की बदलती राजनीति का संकेत है।कांग्रेस की विरासत को लालू यादव ने हथिया ली1970 का दशक PUSU के इतिहास का सबसे चर्चित दौर था। 1973-74 में लालू प्रसाद यादव ने अध्यक्ष रहते हुए जेपी आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाई। इसके बाद 1977 में सुशील कुमार मोदी जैसे नेता उभरे। इसी दौर ने बिहार को रामविलास पासवान और शरद यादव जैसे दिग्गज दिए। हालांकि, 1980 के दशक की शुरुआत में बढ़ती हिंसा और सत्रों में देरी के कारण 1984 में चुनावों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई।पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव रिजल्ट 2026 पद उम्मीदवार का नाम पार्टी मिले वोट रिजल्ट 1. अध्यक्ष शांतनु शेखर एनएसयूआई 2896 जीते 2. उपाध्यक्ष प्रिंस कुमार टीम ओसामा 1568 जीते 3. महासचिव खुशी कुमारी एनएसयूआई 2164 जीतीं 4. संयुक्त सचिव अभिषेक कुमार एबीवीपी 2173 जीते 5. कोषाध्यक्ष हर्षवर्धन एबीवीपी 1519 जीते पीयू छात्र राजनीति में रहा 28 वर्षों का चुनावी सूखा1984 से 2012 तक लगभग 28 सालों तक पटना यूनिवर्सिटी में कोई लोकतांत्रिक (छात्र संघ) चुनाव नहीं हुए। कैंपस में सन्नाटा रहा और छात्र नेतृत्व की एक पूरी पीढ़ी तैयार नहीं हो सकी। 2012 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर चुनाव फिर से बहाल हुए, जिसके बाद आशुतोष रंजन नए दौर के पहले अध्यक्ष बने। बीच में कोरोना और प्रशासनिक कारणों से देरी हुई, फिर से ये प्रक्रिया फिर पटरी पर लौटी।रामजतन सिन्हा के बाद शांतनु शेखर ने लौटाई मानपटना यूनिवर्सिटी में 2026 के चुनाव परिणाम बताते हैं कि छात्र राजनीति अब फिर से मुख्यधारा के संगठनों की ओर लौट रही है। शांतनु शेखर की जीत ने न केवल NSUI को मजबूती दी है, बल्कि ये भी साबित किया है कि छात्र अब पुराने इतिहास और नए विजन के संगम को स्वीकार कर रहे हैं। बिहार की राजनीति में भविष्य के नेतृत्व को आकार देने वाला ये कैंपस अब फिर से राजनीतिक सरगर्मियों का केंद्र बन गया है। विधानसभा चुनाव में मात खाए बिहार कांग्रेस के नेताओं का थोड़ा मोरल बूस्टअप जरूर होगा।लेखक के बारे मेंसुनील पाण्डेयसुनील पाण्डेय, नवभारत टाइम्स बिहार-झारखंड के सीनियर जर्निलिस्ट हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों विधाओं का अनुभव रखते हैं। राजनीति, खेल, बिजनेस और ग्राउंड रिपोर्टिंग में 20 साल का तजुर्बा हैं। प्रतिष्ठित पाक्षिक पत्रिका माया और लोकायत से इन्होंने करियर की शुरुआत की। ईटीवी न्यूज़, महुआ न्यूज़ और ज़ी बिहार-झारखंड में लंबे समय तक कुशलता से अपनी जिम्मेदारी निभाई। न्यूज 18 बिहार-झारखंड में असिस्टेंट न्यूज एडिटर रहते हुए चैनल को नई दिशा दी। ग्राउंड और रिसर्च स्टोरी की रिपोर्टिंग/एडिटिंग में माहिर माने जाते हैं। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर खासी पकड़ रखते हैं। कई अवॉर्ड से सम्मानित सुनील पाण्डेय को डिजिटल माध्यम में दिलचस्पी और सीखने की प्रबल इच्छा इन्हें नवभारत टाइम्स तक खींच लाई। मीडिया के नए प्रयोगों में दिलचस्पी के साथ सीखने की सतत चाहत रखते हैं। जनवरी 2021 से NBT में कार्यरत हैं। इन्होंने प्रतिष्ठित संस्थान पटना विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर और पत्रकारिता की पढ़ाई की है।... और पढ़ें