navbharattimes.indiatimes.com · Feb 26, 2026 · Collected from GDELT
Published: 20260226T184500Z
नई दिल्ली: नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने बृहस्पतिवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) वैश्विक उत्पादकता को अभूतपूर्व गति प्रदान करेगी, लेकिन अगर इसका उपयोग लोगों के लाभ के लिए नहीं किया गया तो यह प्रौद्योगिकी दुनिया भर में असमानताओं को भी बढ़ा सकती है।अमिताभ कांत ने यहां टेरी (द एनर्जी एंड रिर्सोसेस इंस्टीट्यूट) द्वारा आयोजित विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में कहा, ‘‘हमें एआई के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) की आवश्यकता है। यह प्रौद्योगिकी शोधकर्ताओं और स्टार्टअप को उपलब्ध कराई जानी चाहिए, जिसका उपयोग समाज के सुधार और पर्यावरण अनुकूल उपायों की दिशा में और जलवायु अनुसंधान के लिए बेहतर जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाना चाहिए।’’उन्होंने कहा, 'अगर ऐसा नहीं होता है तो एआई अपने उद्देश्य के लिए उपयुक्त नहीं है।’’ जापान से अधिक ऊर्जा खपा रहा AIभारत के पूर्व जी20 शेरपा ने एआई की अत्यधिक ऊर्जा खपत का भी जिक्र किया, जो इसकी सबसे बड़ी कमियों में से एक है।' उन्होंने कहा, 'एआई ऊर्जा की अत्यधिक खपत करता है। आज यह प्रौद्योगिकी पूरे जापान से अधिक ऊर्जा की खपत करती है।' शोध से पता चला है कि ओपनएआई के जीपीटी-3 जैसे बड़े भाषा मॉडल (जो भारी मात्रा में डेटा को प्रसंस्कृत करके मानव भाषा को समझते और उत्पन्न करते हैं) को प्रशिक्षित करने के लिए लगभग 1,300 मेगावाट-घंटे (एमडब्ल्यूएच) बिजली की आवश्यकता होती है।बढ़ सकता है कार्बन उत्सर्जनउन्होंने कहा, 'यह एक गंभीर मुद्दा है क्योंकि बिजली की खपत बढ़ने से कार्बन उत्सर्जन बढ़ सकता है, जिससे जलवायु संकट और भी गंभीर हो जाएगा। इस स्थिति से निपटने के लिए कृत्रिम मेधा को नवीकरणीय ऊर्जा पर चलना होगा। हालांकि, इसके लिए दुनिया को पारेषण और आपूर्ति ग्रिड को अत्याधुनिक बनाना होगा।'लेखक के बारे मेंअभिषेक पाण्डेयअभिषेक पाण्डेय, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कंसल्टेंट राइटर हैं। उन्हें करंट अफेयर्स,राजनीति, क्राइम और जनसरोकार से जुड़ी खबरों पर काम करने का तीन वर्ष से अधिक का अनुभव है। साथ ही इन्होंने 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव 2024 को काफी करीब से कवर किया है। वर्तमान में NBT (DIgital)में राष्ट्रीय खबरें,राजनीति और दिल्ली से जुड़ी खबरों पर कार्य कर रहे हैं। अभिषेक TIL समूह में जुड़ने से पहले दैनिक जागरण में बतौर सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल की है। साथ ही गूगल द्वारा फेक न्यूज वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट भी प्रदान किया गया है।... और पढ़ें