navbharattimes.indiatimes.com · Feb 26, 2026 · Collected from GDELT
Published: 20260226T051500Z
डॉक्टर होने की वजह से मेरे पास आए दिन हड्डियों में दर्द व कमजोरी की शिकायत वाले मरीज आते हैं। अधिकतर मामलों में इस दर्द के पीछे विटामिन-डी की कमी देखी जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि विटामिन-डी का सबसे प्रमुख काम हड्डी और मांसपेशियों के विकास को सपोर्ट करना है। मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम (मसल्स और हड्डी) को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसके अलावा, नर्वस सिस्टम, इम्यून सिस्टम और मेंटल हेल्थ के लिए भी यह न्यूट्रिएंट काफी महत्वपूर्ण है। विटामिन-डी कम होने पर हड्डियों-मांसपेशियों में दर्द, थकान, कमजोरी होती है। डिप्रेशन, मसल्स क्रैम्प, आसानी से फ्रैक्चर होना भी इसके लक्षणों में शामिल हैं।नेशनल एकेडेमीज ऑफ साइंसेज, इंजीनियरिंग एंड मेडिसिन के फूड एंड न्यूट्रिशन बोर्ड ने खून में विटामिन-डी के जरूरी लेवल के बारे में बताया है। फूड एंड न्यूट्रिशन बोर्ड कहता है कि अधिकतर लोगों के लिए खून में 50 nmol/L (20 ng/mL) या उससे ऊपर विटामिन-डी रहना आवश्यक है। जब इसका लेवल 30 nmol/L (12 ng/mL) से नीचे चला जाता है तो विटामिन-डी की डेफिशिएंसी मानी जाती है। इस स्थिति में मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम, नर्वस सिस्टम, इम्यून सिस्टम और मेंटल हेल्थ प्रभावित होने लगते हैं और इनके फंक्शन में गड़बड़ी आ जाती है। इसके कारण शरीर में कई संकेत व लक्षण नजर आते हैं, जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।1. हड्डियों की कमजोरीविटामिन-डी की कमी से हड्डियों में दर्द और कमजोरी की समस्या होती है। इसकी कमी से कैल्शियम का एब्जोर्प्शन भी कम होने लगता है। जिससे हड्डियों की ताकत के लिए जरूरी कैल्शियम नहीं मिलता। साथ ही अपने जरूरी फंक्शन के लिए शरीर हड्डियों पर पहले से मौजूद कैल्शियम भी उतारने लगता है। ये दोनों स्थितियां बोन डेंसिटी में कमी लाती हैं और हड्डियां पतली हो जाती हैं। विटामिन-डी की कमी ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोमलेशिया जैसी बोन डिजीज का खतरा भी बढ़ाती है। गंभीर कमी होने पर खांसी या हल्का-सा धक्का लगने के कारण भी फ्रैक्चर का खतरा रहता है।2. बोन जॉइंट से जुड़ी समस्याएंयह डेफिशिएंसी बोन जॉइंट पर भी बुरा असर डालती है। कैल्शियम की कमी से जोड़ों में कमजोरी आ सकती है। जिससे जोड़ों में दर्द, कट-कट की आवाज आना और जोड़ों के विकास से जुड़े विकार हो सकते हैं। कई सारे शोधों में विटामिन डी की कमी को ऑस्टियोआर्थराइटिस से जोड़कर भी देखा गया है।3. मसल्स में कमजोरीविटामिन डी के लो लेवल से उम्र बढ़ने पर होने वाली मांसपेशी की कमजोरी का खतरा बढ़ता है, जिसे मेडिकल भाषा में Dynapenia कहा जाता है। हार्वर्ड के मुताबिक, इस न्यूट्रिएंट की कमी से ग्रसित बुजुर्गों में Dynapenia का खतरा 70 प्रतिशत ज्यादा होता है। इसकी वजह से मांसपेशियों में दर्द, क्रैम्प या अकड़न का सामना करना पड़ता है।4. बच्चे के शारीरिक विकास में रुकावटबच्चों में विटामिन डी की कमी काफी गंभीर हो सकती है। यह उनके मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम के विकास को बाधित कर सकती है। जिसकी वजह से हड्डियां व स्पाइन कमजोर होकर झुक जाती हैं। यह बच्चों में रिकेट्स की बीमारी का खतरा भी बढ़ाती है।5. खराब मूडएनसीबीआई पर मौजूद एक शोध में विटामिन डी की कमी और मूड डिसऑर्डर के बीच संबंध देखा गया है। इसकी वजह से उदासी, नाउम्मीदगी, डिप्रेशन और एंजायटी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। शोध के मुताबिक, यह विटामिन उन ब्रेन टिश्यू के फंक्शन के लिए अहम होता है, जिनके अस्वस्थ होने पर डिप्रेशन और एंजायटी का खतरा बढ़ता है। 6. बार-बार बीमार पड़ना और जख्म देर से भरनाविटामिन-डी की कमी से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। MDPI पर मौजूद शोध में इसके कम होने पर इम्यून-रिलेटेड डिजीज के खतरे में बढ़ोतरी देखी गई। जब इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, जो इंफेक्शन आसानी से शरीर को पकड़ लेते हैं। वहीं, जख्म और चोट के भरने की रफ्तार भी धीमी हो जाती है।धूप, खाना और सप्लीमेंट का रोलधूप विटामिन डी का नेचुरल सोर्स है, इसलिए इसे सनशाइन विटामिन भी कहा जाता है। NIH के मुताबिक, डाइट में फैटी फिश, फिश लिवर ऑयल, एग योल्क और चीज शामिल करके इस विटामिन को बढ़ाने में मदद मिलती है। विटामिन डी एक फैट सॉल्यूबल विटामिन है, इसलिए इसका अवशोषण बढ़ाने के लिए हेल्दी फैट्स वाले फूड्स जरूर खाएं। इसकी गंभीर कमी को दूर करने के लिए डॉक्टर कुछ सप्लीमेंट्स खाने की सलाह भी दे सकते हैं। आपको विटामिन डी सप्लीमेंट का डॉक्टर की सलाह के बिना सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि शरीर में इसकी अधिकता कई सारी जटिलताओं का खतरा बढ़ाती है।हमने इस लेख की समीक्षा कैसे कीहमारी टीम हेल्थ और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार रिसर्च करती है और भरोसेमंद स्रोतों के आधार पर कंटेंट तैयार करती है। हर आर्टिकल अनुभवी मेडिकल एक्सपर्ट्स द्वारा रिव्यू किया जाता है, ताकि आपको सही, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी मिल सके।वर्तमान संस्करणFeb 26, 2026, 10:02 AMReviewed byDr. Sandeep DoshiFeb 26, 2026, 10:02 AMWritten byसुरेंद्र अग्रवालनवभारत टाइम्स