
livehindustan.com · Feb 27, 2026 · Collected from GDELT
Published: 20260227T024500Z
ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर और दोस्त स्टीव विटकॉफ यूक्रेन-रूस युद्ध और ईरान संकट सुलझाने जिनेवा पहुंचे। जानिए ट्रंप की इस नई कूटनीति, 24 घंटे में हुई ताबड़तोड़ बैठकों और इससे जुड़े विवादों की पूरी इनसाइड स्टोरी।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दामाद जेरेड कुश्नर और पुराने दोस्त स्टीव विटकॉफ को दो सबसे बड़े वैश्विक संकटों- यूक्रेन युद्ध और ईरान के साथ चल रहे तनाव को सुलझाने की अहम जिम्मेदारी सौंपी है। गुरुवार को इन दोनों ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में कुछ ही घंटों के भीतर इन दोनों गंभीर मुद्दों पर अलग-अलग बैठकें कीं।जिनेवा में बैठकों का व्यस्त दौरइन दोनों दूतों का जिनेवा दौरा बेहद व्यस्त और कूटनीतिक हलचलों से भरा रहा। सबसे पहले उन्होंने ओमान के राजदूत के आवास पर ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की। इसका उद्देश्य तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक समझौते पर मुहर लगाना और अमेरिका तथा इजरायली बलों द्वारा किए जा सकने वाले संभावित बड़े हमले को रोकना था। इसके कुछ घंटों बाद, वे इंटरकॉन्टिनेंटल होटल गए जहां उन्होंने यूक्रेनी अधिकारियों के साथ बैठक की। ध्यान रहे, रूसी आक्रमण अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इसके बाद वे फोर सीजन्स होटल गए, जहां उन्होंने अलग-अलग मंजिलों पर रूस और यूक्रेन के दूतों से मुलाकात की। इसके बाद वे फिर से ओमान के राजदूत के आवास पर गए और गुरुवार देर रात अमेरिका लौटने वाले थे।गाजा शांति समझौते में भी भूमिकाइन दोनों की भूमिका केवल यूरोप और ईरान तक सीमित नहीं है। एक हफ्ते से भी कम समय पहले, कुश्नर और विटकॉफ ने 'बोर्ड ऑफ पीस' की उद्घाटन बैठक में भी हिस्सा लिया था। यह संस्था गाजा पट्टी में हमास और इजरायल के बीच लड़ाई रोकने के लिए उनके द्वारा कराए गए युद्धविराम समझौते के तहत बनाई गई है।ट्रंप की रणनीति: भरोसेमंद बनाम सरकारी तंत्रयह पूरी कवायद ट्रंप की कूटनीतिक रणनीति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। वे अमेरिकी सरकार के विशाल और पारंपरिक कूटनीतिक तंत्र (जैसे विदेश विभाग) पर निर्भर रहने के बजाय अपनी सबसे जरूरी प्राथमिकताओं के लिए अपने भरोसेमंद सहयोगियों (दामाद और दोस्त) पर भरोसा कर रहे हैं।विशेषज्ञों की चिंताएं और बचाव:कई विशेषज्ञों का मानना है कि दो लोगों के लिए एक साथ तीन इतनी बड़ी और जटिल वार्ताओं को संभालना असंभव सा है। 'कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस' के वरिष्ठ फेलो और पूर्व वार्ताकार आरोन डेविड मिलर ने कहा- यह बात गले से नहीं उतरती कि राष्ट्रपति के सबसे अच्छे दोस्त और उनके दामाद एक ही समय में इन तीनों वार्ताओं का प्रबंधन कर सकते हैं। इनमें से हर वार्ता अपने आप में विवरणों का एक महासागर है।वाइट हाउस का बचाव: एक अमेरिकी अधिकारी ने इनका बचाव करते हुए कहा कि इन दोनों का सफलता का ट्रैक रिकॉर्ड खुद बोलता है। वे अपने समय का बेहतरीन प्रबंधन करते हैं। उनका व्यावसायिक बैकग्राउंड विश्व नेताओं के साथ बातचीत में मदद करता है और उन्हें नियमित रूप से खुफिया अधिकारियों द्वारा ब्रीफ किया जाता है।व्यावसायिक हितों के टकराव का मुद्दाकुश्नर और विटकॉफ की इस भूमिका पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि मध्य पूर्व में उनके बड़े व्यावसायिक हित जुड़े हुए हैं।जेरेड कुश्नर: इनकी निवेश फर्म 'एफिनिटी पार्टनर्स' अरबों डॉलर का प्रबंधन करती है, जिसमें कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड का पैसा भी शामिल है।स्टीव विटकॉफ: इनकी क्रिप्टो फर्म 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' में हिस्सेदारी है, जो अबू धाबी सरकार से जुड़े फंड्स सहित मध्य पूर्व में सौदे कर रही है। इसके अलावा, विटकॉफ और रूस के वार्ताकार किरिल दिमित्रीव (जो रूस के वेल्थ फंड के प्रमुख भी हैं) ने युद्ध के बाद ऊर्जा, डेटा सेंटर आदि को लेकर आर्थिक समझौतों पर चर्चा की है।रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने चिंता जताते हुए कहा कि वे अच्छे व्यापारी हो सकते हैं, लेकिन वे सीनेट की मंजूरी या किसी सरकारी निगरानी के अधीन नहीं हैं।यूक्रेन का नजरियायूक्रेन ने कुश्नर और विटकॉफ की भागीदारी का स्वागत किया है। यूक्रेन की कोशिश है कि मार्च की शुरुआत में रूसी अधिकारियों के साथ अगली त्रिपक्षीय चर्चा हो, जिससे राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और व्लादिमीर पुतिन की बैठक का रास्ता साफ हो सके। अमेरिका में यूक्रेन की राजदूत ओल्गा स्टेफनिशिना ने कहा कि वे इन दोनों के साथ काम करके खुश हैं क्योंकि उनका सीधे राष्ट्रपति ट्रंप से संपर्क है।हालांकि, ट्रंप के पहले कार्यकाल में यूक्रेन वार्ता के विशेष दूत रहे कर्ट वोल्कर ने माना कि ट्रंप से सीधा संपर्क होना अच्छी बात है, लेकिन नकारात्मक पहलू यह है कि उन्हें (कुश्नर और विटकॉफ को) इन मुद्दों और इनकी संवेदनशीलता की गहरी समझ नहीं है।