dainiktribuneonline.com · Feb 23, 2026 · Collected from GDELT
Published: 20260223T040000Z
Home / देश / TMC के रणनीतिकारों में रहे पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन, माने जाते थे पार्टी के 'चाणक्य'Mukul Roy Passed Away: कोलकाता के साल्ट लेक स्थित अपोलो हॉस्पिटल में ली अंतिम सांसचंडीगढ़/कोलकाता, 09:12 AM Feb 23, 2026 IST Updated At : 09:12 AM Feb 23, 2026 ISTMukul Roy Passed Away: पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय (Mukul Roy) का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होंने कोलकाता के साल्ट लेक स्थित अपोलो हॉस्पिटल में रविवार देर रात 1:30 बजे अंतिम सांस ली। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि कार्डियक अरेस्ट के चलते उनका देहांत हुआ।तृणमूल कांग्रेस के सबसे असरदार रणनीतिकारों में रहेआल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress TMC) के संस्थापक नेताओं में शामिल मुकुल रॉय को कभी ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के बाद पार्टी का दूसरा सबसे ताकतवर चेहरा माना जाता था। 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की ऐतिहासिक जीत और 34 वर्षों से सत्ता में रही लेफ्ट फ्रंट सरकार को सत्ता से बेदखल करने में उनकी रणनीतिक भूमिका अहम मानी जाती है। संगठनात्मक क्षमता और बूथ स्तर की पकड़ के कारण वे पार्टी के “चाणक्य” कहे जाते थे।रेल मंत्री के रूप में कार्यकालसाल 2012 में उन्होंने दिनेश त्रिवेदी (Dinesh Trivedi) की जगह लेते हुए यूपीए-2 सरकार में भारत के 32वें रेल मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। उनका कार्यकाल 20 मार्च 2012 से 21 सितंबर 2012 तक रहा। रेल किराया बढ़ोतरी को लेकर विवाद के बीच उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, बाद में नारदा स्टिंग आपरेशन (Narada sting operation) विवाद के बाद पार्टी में उनकी स्थिति कमजोर पड़ गई और वर्ष 2017 में उन्हें टीएमसी से निष्कासित कर दिया गया।बीजेपी में शामिल हुए, फिर टीएमसी में वापसीनवंबर 2017 में मुकुल रॉय ने भाजपा का दामन थाम लिया। वर्ष 2020 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद अगस्त 2021 में वे पुनः टीएमसी में लौट आए। उस दौरान ममता बनर्जी और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में उनकी घर वापसी हुई। इसके बाद गिरती सेहत के चलते वे सक्रिय राजनीति से लगभग दूर हो गए।लंबे समय से बीमार चल रहे थेमार्च 2023 में उन्हें हाइड्रोसेफेलस (दिमाग में सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड जमा होने की बीमारी) के इलाज के लिए ब्रेन सर्जरी करानी पड़ी। जुलाई 2024 में घर पर गिरने से सिर में चोट लगी और ब्लड क्लॉट हटाने के लिए एक और सर्जरी करनी पड़ी, जिसके बाद उनकी हालत और बिगड़ गई। वे लंबे समय से क्रोनिक डायबिटीज, सांस लेने में दिक्कत और लगातार हाई ब्लड शुगर लेवल जैसी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके करीबी सहयोगियों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में उनकी सेहत लगातार कमजोर होती चली गई थी।राजनीतिक विरासतमुकुल रॉय का राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। टीएमसी में उदय, केंद्रीय मंत्री पद, पार्टी से निष्कासन, बीजेपी में अहम जिम्मेदारी और फिर वापसी। उनका सफर भारतीय राजनीति में रणनीतिक चालों और दलबदल की बड़ी मिसाल माना जाएगा। उनके निधन से पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है।Tags :