
jagran.com · Feb 23, 2026 · Collected from GDELT
Published: 20260223T211500Z
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली सहित देश में एक्सपायरी (समय सीमा समाप्त) दवाओं को नए लेबल, बारकोड व रिपैकेजिंग (पुनर्पैकिंग) के जरिए दोबारा बाजार में उतारने और नकली दवाओं की बिक्री का गोरखधंधा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। पुलिस और संबंधित विभागों की सख्ती और संयुक्त अभियानों के बावजूद इनका नेटवर्क कमजोर पड़ता नजर नहीं आ रहा।2021 से जून 2025 के बीच इस तरह के छह हजार से अधिक मामले दर्ज हुए और करीब आठ हजार आरोपितों की गिरफ्तारी हुई। जबकि 45 लाख से ज्यादा टैबलेट, कैप्सूल और इंजेक्शन जब्त किए गए। जो सार्वजनिक स्वास्थ्य की चिंता बढ़ा रहे हैं। ये वे मामले हैं जो पुलिस और एजेंसियों की कार्रवाई में सामने आए जबकि कई सौदे और सप्लाई चैन अब भी पकड़ से बाहर हैं।केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन) की मासिक ड्रग अलर्ट रिपोर्टों 2024–25 बताती हैं कि इस दौरान बड़ी संख्या में दवा नमूनों को ‘नाट आफ स्टैंडर्ड क्वालिटी्’ (मानक गुणवत्ता से कम) घोषित किया गया, जबकि कई नमूने ‘स्पूरियस’ (नकली) पाए गए।इनमें पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक (प्रतिजैविक) और अन्य सामान्य उपयोग की दवाएं तक शामिल थीं। जनजागरूकता की कमी, सख्त निगरानी और पारदर्शी वितरण प्रणाली के बिना इस पर रोक लगाना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। आपूर्ति श्रृंखला की जटिलता, सीमित निरीक्षण संसाधन व अवैध नेटवर्क की सक्रियता इसे बढ़ावा दे रही है। वर्षवार बढ़ते आंकड़े 2021 में 566 मामले और 857 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं। 2022 में मामले बढ़कर 1343 और 1573 गिरफ्तारी हुई। 2023 में 1415 मामले और 1,736 हुई। 2024 में यह आंकड़ा और बढ़कर 1,854 मामलों तथा 2,290 गिरफ्तारी तक पहुंच गया। 2025 में जून तक इस तरह के 1680 मामलों में 1439 गिरफ्तारियां हुईं। इन पांच वर्षों में कुल 6860 मामलों में 7895 आरोपितों की गिरफ्तारी हुई। चौंकाने वाले आंकड़े -2021 में 42 हजार से ज्यादा टैबलेट तथा इंजेक्शन जब्त हुए।-2022 में 5.64 लाख से अधिक टैबलेट बरामद हुईं।-2023 में 6.38 लाख से ज्यादा टैबलेट जब्त की गईं।-2024 में 28 लाख से अधिक टैबलेट व कैप्सूल बरामद हुए।-2025 (जून तक) में लाखों की संख्या में फार्मास्यूटिकल दवाएं जब्त की गईं। कानून और प्रावधान औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 18 व 27 के तहत नकली, मिलावटी या गलत लेबल वाली दवाओं के निर्माण और बिक्री पर कड़ी सजा का प्रावधान है। इसमें आजीवन कारावास तक शामिल है। 2008 के संशोधन के बाद दंड और कठोर किए गए। दिसंबर 2023 में संशोधित अनुसूची-एम के तहत उत्तम निर्माण प्रक्रिया (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) के नियम सख्त किए गए। क्यूआर कोड अनिवार्य कर दवा की ट्रेसबिलिटी (अनुसरणीयता) सुनिश्चित की गई है। फिर भी मजबूत होता धंधा इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई और नकली और रिपैकेज एक्सपायरी दवाओं की जब्ती के बावजूद धंधेबाजों क नेटवर्क पूरी तरह टूटता नहीं दिख रहा। प्रतिबंधित श्रेणी की ट्रामाडोल, अल्प्राजोलम, नाइट्रोजेपाम और कोडीन आधारित दवाओं जैसी साइकोट्रोपिक दवाओं की बढ़ती जब्ती बता रही है कि धंधे का स्वरूप बदल रहा पर, धंधा नहीं।