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एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस : पुराने पर्चे या AI से दवा लेना सेहत के लिए घातक , जेनरिक दवाओं पर भरोसा जरूरी - noida doctors warn against selfmedication amr dangers
jagran.com
Published 7 days ago

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस : पुराने पर्चे या AI से दवा लेना सेहत के लिए घातक , जेनरिक दवाओं पर भरोसा जरूरी - noida doctors warn against selfmedication amr dangers

jagran.com · Feb 15, 2026 · Collected from GDELT

Summary

Published: 20260215T080000Z

Full Article

भारत जैसे देशों में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता है। नोएडा में दैनिक जागरण द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों में डॉ. रेन ...और पढ़ेंभारत जैसे देशों में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता है। एआई जेनरेटेड इमेजसमय कम है?जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में संक्षेप में पढ़ें जागरण संवाददाता, नोएडा। भारत जैसे विकासशील देशों में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है। आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। डेटा से पता चलता है कि 2019 में दुनिया भर में 30 लाख से ज़्यादा मौतें AMR से जुड़ी थीं। अगर समय रहते एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के बारे में जागरूकता नहीं फैलाई गई, तो भविष्य बहुत चिंताजनक होगा। दैनिक जागरण की ओर से आयोजित सेक्टर 27 क्लब में जिला अस्पताल की पूर्व CMS और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रेनू अग्रवाल ने स्वस्थ भारत के बारे में जागरूकता फैलाई। उन्होंने कहा कि कई लोग सर्दी, खांसी, बुखार या वायरल इंफेक्शन जैसे इंफेक्शन से चार से पांच दिन में ठीक हो जाते हैं। लेकिन, वायरस को जल्दी रोकने की कोशिश में लोग पास के मेडिकल स्टोर पर जाकर तरह-तरह की दवाएं खा लेते हैं। ऐसे में, अगर एक-दो महीने बाद फिर से तबीयत खराब होती है, तो मरीज पुरानी दवाओं के आधार पर दवाएं खरीदकर फिर से लेना शुरू कर देते हैं। जब उन्हें बेहतर महसूस होता है, तो वे उन्हें लेना बंद कर देते हैं। यह लापरवाही मरीजों को बीमार करती रहती है।उन्होंने चिंता जताई कि अगर एंटीबायोटिक्स बीमारियों पर बेअसर रहीं, तो नई एंटीबायोटिक्स बनने में 15 से 20 साल लग जाएंगे। इसलिए, लंबे इंतजार, मुश्किल और बहुत महंगे प्रोसेस की वजह से लोग दवा कंपनियों में ज़्यादा इन्वेस्ट करने से बच रहे हैं। जेनेरिक दवाओं पर भरोसा भी जरूरी पूर्व CMS डॉ. रेनू अग्रवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलग-अलग जगहों पर जेनेरिक दवा की दुकानें खोली हैं। लेकिन, लोगों में यह गलतफहमी है कि ये दवाएं तुरंत असर नहीं करतीं। उन्होंने दैनिक जागरण के एक फोरम पर इस गलतफहमी को दूर करते हुए कहा कि जेनेरिक दवाओं की टेस्टिंग बड़ी, ऑथराइज़्ड लैब में होती है। सरकारी मंज़ूरी मिलने के बाद ही इन्हें बाज़ार में उतारा जाता है। ये दवाएं दूसरी दवाओं से बेहतर और सस्ती भी होती हैं। जैसा कि मुझे पता था, दवाएं बीमार होने पर आराम देती हैं, लेकिन हैरानी की बात है कि उनका एक तय कोर्स या दिनों का नंबर भी होता है। बीमारी के बाद भी कोर्स पूरा न करने से गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती हैं। -सीमा सिंघल पूर्व CMS डॉ. रेनू ने बताया कि जेनेरिक दवाएं भी दूसरी दवाओं जितनी ही फायदेमंद होती हैं। लेकिन, लोग जेनेरिक दवाओं पर आसानी से भरोसा नहीं करते। आज का अवेयरनेस सेशन बहुत अच्छा था। सभी को इसमें हिस्सा लेना चाहिए। -लता गोयल मैं दैनिक जागरण का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की पूर्व CMS डॉ. रेनू अग्रवाल को कीनोट स्पीकर के तौर पर बुलाया और इस ज़रूरी अवेयरनेस कैंपेन में जरूरी जानकारी दी। लाखों रीडर्स का पसंदीदा यह अखबार हमेशा देश और समाज के भले के लिए कैंपेन चलाता है। -राजीव गर्ग दैनिक जागरण ने एंटीबायोटिक्स पर एक बहुत अच्छा कैंपेन चलाया है। सबसे अच्छी बात जेनेरिक दवाओं का इस्तेमाल करना था। जैसा कि डॉ. रेनू ने बताया, सर्दी, खांसी, फ्लू और बुखार की दवा लेने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। मैं आगे भी इस बात का ध्यान रखूंगा। -मदन लाल शर्मा प्रतीक विस्टेरिया सोसाइटी सेक्टर 39 के डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में मेडिसिन के MD डॉ. अनुराग सागर ने सेक्टर 76 की प्रतीक विस्टेरिया सोसाइटी में बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं और दूसरे स्टाफ को एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल के बारे में जागरूक किया। उन्होंने लोगों से खास अपील की कि इस मॉडर्न जमाने में कोई भी AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) या इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म से मिली जानकारी के आधार पर दवा न खाए। पुरानी दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन या अधूरी जानकारी के आधार पर बार-बार दवा लेने से, कुछ समय के लिए आराम मिलने के बाद, सेहत को काफी नुकसान हो सकता है। इसी बीच, एक बुजुर्ग ने पूछा कि क्या एंटीबायोटिक्स लेना हमेशा नुकसानदायक होता है। उन्होंने जवाब दिया कि बीमार होने पर पहले डॉक्टर से सलाह लें और फिर उनकी सलाह पर ब्लड टेस्ट करवाएं। रिपोर्ट के आधार पर मरीज़ को स्पेशलिस्ट की बताई दवा लेनी चाहिए, न कि खुद से दवा खरीदनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि हर बीमारी मुख्य रूप से अलग इन्फेक्शन की वजह से होती है। सोसाइटी के क्लब हाउस में डेढ़ घंटे से ज़्यादा चले जागरूकता प्रोग्राम के दौरान लोगों ने कई सवाल पूछे और उनके जवाब भी मिले। एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल के बारे में लोगों को जागरूक होना जरूरी है। डॉ. अनुराग, MD मेडिसिन ने इंटरनेट मीडिया का इस्तेमाल करने और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने के बारे में जागरूकता फैलाई। -नितेश रंजन AMR आज एक बड़ी समस्या है। इसके बारे में सभी को जागरूक होना ज़रूरी है। दैनिक जागरण ने आज सोसायटी में एक बेहतरीन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। सीनियर डॉक्टर की बात सुनने के बाद स्टाफ और दूसरे लोग जरूर ध्यान रखेंगे। -नवनीत जोहरी सीनियर डॉक्टर ने जिस तरह से टॉपिक को विस्तार से समझाने के लिए कई उदाहरण दिए, वह बहुत प्रभावशाली था। बीमारी होने पर सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी मेडिकल स्टोर से पुरानी प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाएं लेने से बचें। -संजय सिंह मैंने कई साल पहले एक बीमारी के लिए बहुत सारी दवाएं लीं। 15-16 दवाओं में से, लगभग 12 ने काम करना बंद कर दिया। एक सीनियर डॉक्टर ने मेरी देखरेख की और सभी जरूरी टेस्ट किए और सफलतापूर्वक इलाज किया। यह भी पढ़ें: 'सेफ सिटी' में महिला सुरक्षा होगी फुल प्रूफ, नोएडा में लगेंगे 2100 एआई बेस्ड नाइट विजन-फेस डिटेक्शन कैमरे


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